Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.13 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.13

4.13
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः । तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ॥ ४-१३ ॥
cāturvarṇyaṃ mayā sṛṣṭaṃ guṇakarmavibhāgaśaḥ | tasya kartāramapi māṃ viddhyakartāramavyayam || 4-13 ||
— चारों वर्ण मेरे द्वारा रचे गए ; — गुण और कर्म के विभाग से ; — यद्यपि मैं उसका कर्ता ; — मुझे अकर्ता, अव्यय जान

गुण और कर्म के विभाग के अनुसार चारों वर्ण मेरे द्वारा रचे गए हैं; यद्यपि मैं उनका कर्ता हूँ, फिर भी मुझे अकर्ता और अव्यय जानो।