Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.15 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.15

4.15
एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः । कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ॥ ४-१५ ॥
evaṃ jñātvā kṛtaṃ karma pūrvairapi mumukṣubhiḥ | kuru karmaiva tasmāttvaṃ pūrvaiḥ pūrvataraṃ kṛtam || 4-15 ||
— यह जानकर कर्म किया गया ; — पूर्व के मुमुक्षुओं ने भी ; — अतः तू भी कर्म ही कर ; — पूर्वजों ने जैसे प्राचीन काल में किया

यह जानकर पूर्वकाल के मुमुक्षुओं ने भी कर्म किया था; अतः तू भी वैसे ही कर्म कर, जैसे पूर्वजों ने प्राचीन काल में किया।