Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.16 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.16

4.16
किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः । तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥ ४-१६ ॥
kiṃ karma kimakarmeti kavayo'pyatra mohitāḥ | tatte karma pravakṣyāmi yajjñātvā mokṣyase'śubhāt || 4-16 ||
— कर्म क्या, अकर्म क्या ; — विद्वान् भी इसमें मोहित ; — वह कर्म मैं तुझे बताऊँगा ; — जिसे जानकर तू अशुभ से मुक्त होगा

कर्म क्या है और अकर्म क्या है? — इसमें विद्वान् भी मोहित हो जाते हैं। मैं तुझे वह कर्म बताऊँगा, जिसे जानकर तू अशुभ से मुक्त हो जाएगा।