एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना ।
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ॥
३-४८ ॥
evaṃ buddheḥ paraṃ buddhvā saṃstabhyātmānamātmanā |
jahi śatruṃ mahābāho kāmarūpaṃ durāsadam ||
3-48 ||
हे महाबाहु, इस प्रकार बुद्धि से परे (आत्मा) को जानकर, आत्मा के द्वारा अपने को स्थिर करके, काम-रूप दुर्जय शत्रु का वध कर डालो।