Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.48 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.48

3.48
एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना । जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ॥ ३-४८ ॥
evaṃ buddheḥ paraṃ buddhvā saṃstabhyātmānamātmanā | jahi śatruṃ mahābāho kāmarūpaṃ durāsadam || 3-48 ||
— इस प्रकार बुद्धि से परे (आत्मा) को जानकर ; — आत्मा से अपने को स्थिर करके ; — शत्रु का वध कर, हे महाबाहु ; — काम-रूप दुर्जय को

हे महाबाहु, इस प्रकार बुद्धि से परे (आत्मा) को जानकर, आत्मा के द्वारा अपने को स्थिर करके, काम-रूप दुर्जय शत्रु का वध कर डालो।