Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.29 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.29

2.29
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत ! अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ॥ २-२९ ॥
avyaktādīni bhūtāni vyaktamadhyāni bhārata ! avyaktanidhanānyeva tatra kā paridevanā || 2-29 ||
— भूत आदि में अव्यक्त होते हैं ; — मध्य में व्यक्त ; — हे भारत ; — अन्त में फिर अव्यक्त ही ; — इसमें क्या शोक

हे भारत, समस्त भूत आदि में अव्यक्त, मध्य में व्यक्त और अन्त में फिर अव्यक्त होते हैं; इसमें शोक का क्या प्रयोजन?