Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.26 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.26

2.26
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते । तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि ॥ २-२६ ॥
avyakto'yamacintyo'yamavikāryo'yamucyate | tasmādevaṃ viditvainaṃ nānuśocitumarhasi || 2-26 ||
— यह अव्यक्त, यह अचिन्त्य ; — यह अविकार्य कहा जाता है ; — अतः इसे ऐसा जानकर ; — तुझे शोक करना उचित नहीं

यह अव्यक्त, अचिन्त्य और अविकार्य कहा जाता है; अतः इसे ऐसा जानकर तुम्हें शोक करना उचित नहीं।