Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.26
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते ।
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि ॥
२-२६ ॥
avyakto'yamacintyo'yamavikāryo'yamucyate |
tasmādevaṃ viditvainaṃ nānuśocitumarhasi ||
2-26 ||
— यह अव्यक्त, यह अचिन्त्य ; — यह अविकार्य कहा जाता है ; — अतः इसे ऐसा जानकर ; — तुझे शोक करना उचित नहीं यह अव्यक्त, अचिन्त्य और अविकार्य कहा जाता है; अतः इसे ऐसा जानकर तुम्हें शोक करना उचित नहीं।