Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.9 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.9

18.9
कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन । सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः ॥ १८-९ ॥
kāryamityeva yatkarma niyataṃ kriyate'rjuna | saṅgaṃ tyaktvā phalaṃ caiva sa tyāgaḥ sāttviko mataḥ || 18-9 ||
— जो कर्म 'कर्तव्य है' ऐसा ही ; — नियत किया जाता है, हे अर्जुन ; — आसक्ति और फल को त्यागकर ; — वह त्याग सात्त्विक माना गया

हे अर्जुन, जो नियत कर्म 'कर्तव्य है' ऐसा मानकर ही, आसक्ति और फल को त्यागकर किया जाता है — वह त्याग सात्त्विक माना गया है।