Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.30 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.30

13.30
प्रकृत्यैव हि कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः । यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥ १३-३० ॥
prakṛtyaiva hi karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśaḥ | yaḥ paśyati tathātmānamakartāraṃ sa paśyati || 13-30 ||
— कि कर्म प्रकृति के द्वारा ही ; — सब प्रकार से किए जाते हैं ; — जो देखता है, और आत्मा को वैसे ही ; — अकर्ता, वही देखता है

जो यह देखता है कि कर्म सब प्रकार से प्रकृति के द्वारा ही किए जाते हैं, और वैसे ही आत्मा को अकर्ता देखता है — वही (वस्तुतः) देखता है।