Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.29 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.29

13.29
समं पश्यन् हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् । न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम् ॥ १३-२९ ॥
samaṃ paśyan hi sarvatra samavasthitamīśvaram | na hinastyātmanātmānaṃ tato yāti parāṃ gatim || 13-29 ||
— क्योंकि सर्वत्र समान देखता हुआ ; — समान रूप से स्थित ईश्वर को ; — आत्मा से आत्मा का नाश नहीं करता ; — इससे परम गति को जाता है

क्योंकि सर्वत्र समान रूप से स्थित ईश्वर को समान देखता हुआ वह आत्मा से आत्मा का नाश नहीं करता; इससे वह परम गति को प्राप्त होता है।