Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.26 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.26

13.26
अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते । तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः ॥ १३-२६ ॥
anye tvevamajānantaḥ śrutvānyebhya upāsate | te'pi cātitarantyeva mṛtyuṃ śrutiparāyaṇāḥ || 13-26 ||
— किन्तु अन्य इस प्रकार न जानते हुए ; — दूसरों से सुनकर उपासना करते हैं ; — वे भी मृत्यु को पार कर जाते हैं ; — श्रुति के परायण

किन्तु अन्य लोग इस प्रकार न जानते हुए, दूसरों से सुनकर उपासना करते हैं; वे भी श्रुति के परायण होकर मृत्यु को पार कर जाते हैं।