Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.1 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.1

13.1
प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च । एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव ॥ १३-१ ॥
prakṛtiṃ puruṣaṃ caiva kṣetraṃ kṣetrajñameva ca | etadveditumicchāmi jñānaṃ jñeyaṃ ca keśava || 13-1 ||
— प्रकृति और पुरुष ; — क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ ; — इसे मैं जानना चाहता हूँ ; — ज्ञान और ज्ञेय, हे केशव

हे केशव, प्रकृति और पुरुष को, क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ को, तथा ज्ञान और ज्ञेय को — इसे मैं जानना चाहता हूँ।