Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 12.1 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)12.1

12.1
एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥ १२-१ ॥
evaṃ satatayuktā ye bhaktāstvāṃ paryupāsate | ye cāpyakṣaramavyaktaṃ teṣāṃ ke yogavittamāḥ || 12-1 ||
— जो भक्त इस प्रकार सदा युक्त होकर ; — आपकी उपासना करते हैं ; — और जो अक्षर अव्यक्त की ; — इनमें कौन योग के श्रेष्ठ ज्ञाता

जो भक्त इस प्रकार सदा युक्त होकर आपकी उपासना करते हैं, और जो अक्षर अव्यक्त की उपासना करते हैं — इनमें कौन योग के श्रेष्ठ ज्ञाता हैं?