Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.9 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.9

10.9
मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम् । कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमयन्ति च ॥ १०-९ ॥
maccittā madgataprāṇā bodhayantaḥ parasparam | kathayantaśca māṃ nityaṃ tuṣyanti ca ramayanti ca || 10-9 ||
— मुझमें चित्त वाले, मुझमें प्राण अर्पित ; — परस्पर बोध कराते हुए ; — और नित्य मेरी कथा करते हुए ; — सन्तुष्ट होते हैं और आनन्द पाते हैं

मुझमें चित्त वाले, मुझमें प्राण अर्पित किए हुए, परस्पर बोध कराते हुए और नित्य मेरी कथा करते हुए वे सन्तुष्ट होते हैं और आनन्द पाते हैं।