Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.38 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.38

10.38
दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् । मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् ॥ १०-३८ ॥
daṇḍo damayatāmasmi nītirasmi jigīṣatām | maunaṃ caivāsmi guhyānāṃ jñānaṃ jñānavatāmaham || 10-38 ||
— दमन करने वालों में दण्ड हूँ ; — विजय के इच्छुकों की नीति हूँ ; — गुह्य वस्तुओं में मौन भी हूँ ; — ज्ञानियों का ज्ञान हूँ

दमन करने वालों में मैं दण्ड हूँ, विजय की इच्छा रखने वालों की नीति हूँ; गुह्य वस्तुओं में मौन हूँ, और ज्ञानियों का ज्ञान हूँ।