Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.31 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.31

10.31
पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् । झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥ १०-३१ ॥
pavanaḥ pavatāmasmi rāmaḥ śastrabhṛtāmaham | jhaṣāṇāṃ makaraścāsmi srotasāmasmi jāhnavī || 10-31 ||
— पवित्र करने वालों में पवन हूँ ; — शस्त्रधारियों में राम हूँ ; — मत्स्यों में मकर भी हूँ ; — स्रोतों में गंगा हूँ

पवित्र करने वालों में मैं पवन हूँ, शस्त्रधारियों में राम हूँ, मत्स्यों में मकर हूँ, और स्रोतों (नदियों) में गंगा हूँ।