Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.29 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.29

10.29
अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम् । पितृणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम् ॥ १०-२९ ॥
anantaścāsmi nāgānāṃ varuṇo yādasāmaham | pitṛṇāmaryamā cāsmi yamaḥ saṃyamatāmaham || 10-29 ||
— नागों में अनन्त भी हूँ ; — जलचरों में वरुण हूँ ; — पितरों में अर्यमा भी हूँ ; — संयम करने वालों में मैं यम

नागों में मैं अनन्त हूँ, जलचरों में वरुण हूँ, पितरों में अर्यमा हूँ, और संयम करने वालों में मैं यम हूँ।