The Great Liberation Tantra3.94
ये त्यजन्ति नरा मूढा महामन्त्रेण संस्कृतम् ।
अन्नतोयादिकं भद्रे पितॄंस्ते पातयन्त्यधः ॥९४॥
ye tyajanti narā mūḍhā mahāmantreṇa saṃskṛtam |
annatoyādikaṃ bhadre pitṝṃste pātayantyadhaḥ ||94||
— जो ; — त्याग करते हैं ; — मनुष्य ; — मूढ़ ; — महामन्त्र से ; — संस्कृत ; — अन्न, जल आदि को ; — हे भद्रे ; — पितरों को ; — वे ; — गिरा देते हैं ; — नीचे हे भद्रे, जो मूढ़ मनुष्य महामन्त्र से संस्कृत अन्न, जल आदि का त्याग करते हैं, वे अपने पितरों को नीचे गिरा देते हैं;