The Great Liberation Tantra· 3.93 / 153

The Great Liberation Tantra3.93

3.93
वरं पापशतं कुर्याद्वरं विप्रबधं प्रिये । परब्रह्मार्पिते ह्यन्ने न कुर्यादवहेलनम् ॥९३॥
varaṃ pāpaśataṃ kuryādvaraṃ viprabadhaṃ priye | parabrahmārpite hyanne na kuryādavahelanam ||93||
— अच्छा ; — सौ पाप ; — करे ; — अच्छा ; — ब्रह्महत्या ; — हे प्रिये ; — परम ब्रह्म को अर्पित ; — निश्चय ही ; — अन्न का ; — नहीं ; — करे ; — अवहेलन

हे प्रिये, सौ पाप कर लेना अच्छा, ब्रह्महत्या कर लेना अच्छा — पर परम ब्रह्म को अर्पित अन्न का अवहेलन नहीं करना चाहिए।