The Great Liberation Tantra3.92
जातिभेदो न कर्तव्यः प्रसादे परमात्मनः ।
योऽशुद्धबुद्धिं कुरुते स महापातकी भवेत् ॥९२॥
jātibhedo na kartavyaḥ prasāde paramātmanaḥ |
yo'śuddhabuddhiṃ kurute sa mahāpātakī bhavet ||92||
— जाति-भेद ; — नहीं ; — करना चाहिए ; — प्रसाद में ; — परमात्मा के ; — जो ; — अशुद्ध बुद्धि ; — करता है ; — वह ; — महापातकी ; — हो परमात्मा के प्रसाद में जाति-भेद नहीं करना चाहिए; जो (उसमें) अशुद्ध बुद्धि करता है, वह महापातकी हो जाता है।