The Great Liberation Tantra· 3.45 / 153

The Great Liberation Tantra3.45

3.45
वामनासापुटं धृत्वा दक्षनासापुटेन च । पूअयेत् पवनं मन्त्री मूलमष्टमितं जपन् ॥४५॥
vāmanāsāpuṭaṃ dhṛtvā dakṣanāsāpuṭena ca | pūayet pavanaṃ mantrī mūlamaṣṭamitaṃ japan ||45||
— वाम नासिका-पुट को ; — बन्द करके ; — दक्षिण नासिका-पुट से ; — और ; — भरे, पूरक करे ; — वायु को ; — मन्त्री ; — मूल-मन्त्र को आठ बार ; — जपते हुए

वाम नासिका-पुट को बन्द करके, दक्षिण नासिका-पुट से मन्त्री वायु को भरे (पूरक करे), मूल-मन्त्र को आठ बार जपते हुए;