The Great Liberation Tantra· 3.44 / 153

The Great Liberation Tantra3.44

3.44
प्राणायामं ततः कुर्यान् मूलेन प्रणवेन वा । मध्यमानामिकाभ्याञ्च दक्षहस्तस्य पार्वति ॥४४॥
prāṇāyāmaṃ tataḥ kuryān mūlena praṇavena vā | madhyamānāmikābhyāñca dakṣahastasya pārvati ||44||
— प्राणायाम ; — तदनन्तर ; — करे ; — मूल-मन्त्र से ; — प्रणव से ; — अथवा ; — मध्यमा और अनामिका से ; — दाहिने हाथ की ; — हे पार्वति

हे पार्वति, तदनन्तर मूल-मन्त्र अथवा प्रणव से, दाहिने हाथ की मध्यमा और अनामिका से प्राणायाम करे।