The Great Liberation Tantra· 3.40 / 153

The Great Liberation Tantra3.40

3.40
चतुर्वर्गफलावाप्त्यै विनियोगः प्रकीर्तितः । अङ्गन्यासकरन्यासौ कथयामि शृणु प्रिये ॥४०॥
caturvargaphalāvāptyai viniyogaḥ prakīrtitaḥ | aṅganyāsakaranyāsau kathayāmi śṛṇu priye ||40||
— चारों पुरुषार्थों के फल की प्राप्ति के लिए ; — विनियोग ; — कहा गया ; — अंगन्यास और करन्यास ; — कहता हूँ ; — सुनो ; — हे प्रिये

चारों पुरुषार्थों के फल की प्राप्ति के लिए इसका विनियोग कहा गया। हे प्रिये, अंगन्यास और करन्यास कहता हूँ; सुनो।