The Great Liberation Tantra· 2.46 / 54

The Great Liberation Tantra2.46

2.46
सर्वे देवाश्च देव्यश्च तन्मयाः सुरवन्दिते । आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं तन्मयं सकलं जगत् ॥४६॥
sarve devāśca devyaśca tanmayāḥ suravandite | ābrahmastambaparyantaṃ tanmayaṃ sakalaṃ jagat ||46||
— समस्त देव ; — और देव ; — और देवियाँ ; — उसी से बने ; — हे सुरवन्दिते ; — ब्रह्मा से लेकर तृण के गुच्छे तक ; — उसी से बना ; — समस्त ; — जगत्

हे सुरवन्दिते, समस्त देव और देवियाँ उसी से बने हैं; ब्रह्मा से लेकर तृण के गुच्छे तक समस्त जगत् उसी से बना है।