The Great Liberation Tantra· 2.45 / 54

The Great Liberation Tantra2.45

2.45
कालं कालयते काले मृत्योर्मृत्युर्भियो भयम् । वेदान्तवेद्यो भगवान् यत्तच्छब्दोपलक्षितः ॥४५॥
kālaṃ kālayate kāle mṛtyormṛtyurbhiyo bhayam | vedāntavedyo bhagavān yattacchabdopalakṣitaḥ ||45||
— काल को ; — चलाता है ; — समय में ; — मृत्यु की मृत्यु ; — भय का ; — भय ; — वेदान्त से वेद्य ; — भगवान् ; — 'यत्'-'तत्' शब्दों से लक्षित

जो काल में काल को भी चलाता है, मृत्यु की मृत्यु और भय का भय है — वह भगवान्, वेदान्त से वेद्य, 'यत्' और 'तत्' शब्दों से लक्षित है।