The Great Liberation Tantra· 1.69 / 72

The Great Liberation Tantra1.69

1.69
शुद्धचित्ताः परहिता मातापित्रोः प्रियङ्कराः । स्वदारनिष्ठाः पुरुषाः परस्त्रीषु पराङ्मुखाः ॥६९॥
śuddhacittāḥ parahitā mātāpitroḥ priyaṅkarāḥ | svadāraniṣṭhāḥ puruṣāḥ parastrīṣu parāṅmukhāḥ ||69||
— शुद्ध-चित्त ; — परहित में रत ; — माता-पिता के ; — प्रिय करने वाले ; — अपनी स्त्रियों में निष्ठावान् ; — पुरुष ; — पराई स्त्रियों में ; — विमुख

(ऐसा उपाय जिससे) मनुष्य शुद्ध-चित्त, परहित में रत, माता-पिता के प्रिय करने वाले, अपनी स्त्रियों में निष्ठावान्, और पराई स्त्रियों से विमुख हों;