The Great Liberation Tantra1.49
सत्कथालापमात्रञ्च न तेषां मनसि क्वचित् ।
त्वया कृतानि तन्त्राणि जीवोद्धारणहेतवे ॥४९॥
satkathālāpamātrañca na teṣāṃ manasi kvacit |
tvayā kṛtāni tantrāṇi jīvoddhāraṇahetave ||49||
— सत्कथा का मात्र आलाप ; — और ; — नहीं ; — उनके ; — मन में ; — कहीं ; — तुम्हारे द्वारा ; — रचे गए ; — तन्त्र ; — जीवों के उद्धार के हेतु सत्कथा का मात्र आलाप भी कभी उनके मन में नहीं होगा। आपने जीवों के उद्धार के लिए तन्त्रों की रचना की —