The Great Liberation Tantra· 1.50 / 72

The Great Liberation Tantra1.50

1.50
निगमागमजातानि भुक्तिमुक्तिकराणि च । देवीनां यत्र देवानां मन्त्रयन्त्रादिसाधनम् । कथिता बहवो न्यासाः सृष्टिस्थित्यादिलक्षणाः ॥५०॥
nigamāgamajātāni bhuktimuktikarāṇi ca | devīnāṃ yatra devānāṃ mantrayantrādisādhanam | kathitā bahavo nyāsāḥ sṛṣṭisthityādilakṣaṇāḥ ||50||
— निगम और आगम के रूप में उत्पन्न ; — भुक्ति और मुक्ति देने वाले ; — और ; — देवियों के ; — जहाँ ; — देवों के ; — मन्त्र, यन्त्र आदि साधन ; — कहे गए ; — बहुत-से ; — न्यास ; — सृष्टि-स्थिति आदि के लक्षण वाले

जो निगम और आगम के रूप में उत्पन्न हुए, भुक्ति और मुक्ति देने वाले, जिनमें देवियों और देवों के लिए मन्त्र, यन्त्र आदि साधन कहे गए हैं, और सृष्टि-स्थिति आदि के लक्षण वाले बहुत-से न्यास कहे गए हैं।