The Great Liberation Tantra· 1.51 / 72

The Great Liberation Tantra1.51

1.51
बद्धपद्मासनादीनि गदितान्यपि भूरिशः । पशुवीरदिव्यभावा देवता मन्त्रसिद्धिदाः ॥५१॥
baddhapadmāsanādīni gaditānyapi bhūriśaḥ | paśuvīradivyabhāvā devatā mantrasiddhidāḥ ||51||
— बद्ध पद्मासन आदि ; — कहे गए ; — भी ; — अनेक प्रकार से ; — पशु, वीर और दिव्य भाव ; — देवताएँ ; — मन्त्र-सिद्धि देने वाली

बद्ध पद्मासन आदि भी अनेक प्रकार से कहे गए; पशु, वीर और दिव्य भाव, तथा मन्त्र-सिद्धि देने वाली देवताएँ (भी कही गईं)।