The Great Liberation Tantra· 1.52 / 72

The Great Liberation Tantra1.52

1.52
शवासनं चितारोहो मुण्डसाधनमेव च । लतासाधनकर्माणि त्वयोक्तानि सहस्रशः ॥५२॥
śavāsanaṃ citāroho muṇḍasādhanameva ca | latāsādhanakarmāṇi tvayoktāni sahasraśaḥ ||52||
— शवासन (शव-आसन रीति) ; — चितारोह, चिता पर आरोहण ; — मुण्ड-साधन ; — निश्चय ही ; — और ; — लता-साधन के कर्म ; — तुम्हारे द्वारा कहे गए ; — सहस्रों प्रकार से

शवासन, चितारोह (चिता पर आरोहण), मुण्ड-साधन, और लता-साधन के कर्म आपने सहस्रों प्रकार से कहे।