The Great Liberation Tantra· 1.48 / 72

The Great Liberation Tantra1.48

1.48
नैव पानादिनियमो भक्ष्याभक्ष्यविवेचनम् । धर्मशास्त्रे सदा निन्दा साधुद्रोही निरन्तरम् ॥४८॥
naiva pānādiniyamo bhakṣyābhakṣyavivecanam | dharmaśāstre sadā nindā sādhudrohī nirantaram ||48||
— नहीं ही ; — पान आदि का नियम ; — भक्ष्य-अभक्ष्य का विवेक ; — धर्मशास्त्र के प्रति ; — सदा ; — निन्दा ; — सज्जनों से द्रोह करने वाला ; — निरन्तर

न पान आदि का कोई नियम, न भक्ष्य-अभक्ष्य का विवेक रहेगा; धर्मशास्त्र की सदा निन्दा और सज्जनों से निरन्तर द्रोह होगा।