आनन्दे महति प्राप्ते दृष्टे वा बान्धवे चिरात् ।
आनन्दमुद्गतं ध्यात्वा तल्लयस्तन्मना भवेत् ॥१०६॥
ānande mahati prāpte dṛṣṭe vā bāndhave cirāt |
ānandam udgataṃ dhyātvā tallayas tanmanā bhavet
anuṣṭubh
महान् आनन्द प्राप्त होने पर, अथवा बहुत समय बाद बान्धव (प्रियजन) के देखने पर — उद्गत (उठते हुए) आनन्द का ध्यान करके (साधक) तल्लीन, तन्मय हो जाता है। (धारणा ८३)