The Essence of the Tantra· 9.37 / 53

The Essence of the Tantra9.37

9.37

विकल्पन्यूनत्वे तु तुटिन्यूनता सुखादिसंवित्ताव् इव यावत् अविकल्पतैव

Transliteration (IAST)

vikalpanyūnatve tu tuṭinyūnatā sukhādisaṃvittāv iva yāvat avikalpataiva

— विकल्प के न्यून होने पर ; — तुटि की न्यूनता ; — सुख आदि की संवित्ति में ; — जैसे, इव ; — जब तक अविकल्पता ही (न हो)

किन्तु विकल्प के न्यून होने पर तुटि की न्यूनता (होती है) — जैसे सुख आदि की संवित्ति में — जब तक अविकल्पता ही (न हो जाये)।