The Essence of the Tantra· 8.90 / 93

The Essence of the Tantra8.90

8.90

अन्ये शब्दस्पर्शाभ्यां वायुः इत्यादिक्रमेण पञ्चभ्यो धरणी इति मन्यन्ते

Transliteration (IAST)

anye śabdasparśābhyāṃ vāyuḥ ityādikrameṇa pañcabhyo dharaṇī iti manyante

— शब्द-स्पर्श से (दोनों से) ; — वायु ; — पाँचों (तन्मात्रों) से ; — धरणी (पृथिवी) ; — मानते हैं

अन्य (आचार्य) मानते हैं कि शब्द-स्पर्श से वायु — इत्यादि क्रम से, पाँचों (तन्मात्रों) से धरणी (पृथिवी उत्पन्न होती है)।