The Essence of the Tantra· 8.38 / 93

The Essence of the Tantra8.38

8.38

एवम् अन्योन्यश्लेषात् अलक्षणीयान्तरत्वं पुंस्कलयोः

Transliteration (IAST)

evam anyonyaśleṣāt alakṣaṇīyāntaratvaṃ puṃskalayoḥ

— परस्पर श्लेष (मिलन) के कारण ; — अलक्षणीयान्तरत्व — जिनका परस्पर भेद लक्षित न हो सके ; — पुरुष और कला का

इस प्रकार परस्पर श्लेष (मिलन) के कारण पुरुष और कला का अन्तर अलक्षणीय (अप्रत्यक्ष) हो जाता है।