The Essence of the Tantra· 7.24 / 28

The Essence of the Tantra7.24

7.24

यावद् अशेषशक्तितत्त्वान्तो ऽध्वा शिवतत्त्वेन व्याप्तः

Transliteration (IAST)

yāvad aśeṣaśaktitattvānto 'dhvā śivatattvena vyāptaḥ

— समस्त शक्ति-तत्त्व-पर्यन्त ; — अध्वा (अभिव्यक्ति का मार्ग) ; — शिव-तत्त्व से ; — व्याप्त

समस्त शक्ति-तत्त्व-पर्यन्त अध्वा शिव-तत्त्व से व्याप्त है।