The Essence of the Tantra· 5.40 / 43

The Essence of the Tantra5.40

5.40

यस्य तु समसम्प्रवेशात् पूर्णां चिद्बीजपिण्डवर्णविधौ

Transliteration (IAST)

yasya tu samasampraveśāt pūrṇāṃ cidbījapiṇḍavarṇavidhau

— सम (सन्तुलित) सम्प्रवेश से ; — पूर्ण (संवित्) को ; — चित्-बीज, पिण्ड एवं वर्ण की विधि में

किन्तु जिसके लिए सम (सन्तुलित) सम्प्रवेश से (वह उदित होता है, वह) चित्-बीज, पिण्ड एवं वर्ण की विधि में पूर्ण (संवित्) को (प्राप्त करता है)।