The Essence of the Tantra· 3.2 / 34

The Essence of the Tantra3.2

3.2

न हि स रसो मुख्यः तत्कार्यव्याधिशमनाद्यदृष्टेः

Transliteration (IAST)

na hi sa raso mukhyaḥ tatkāryavyādhiśamanādyadṛṣṭeḥ

— रस (प्रतिबिम्बित स्वाद) ; — मुख्य — वास्तविक, प्रधान ; — उसका कार्य — व्याधि-शमन आदि ; — दृष्टिगोचर न होने के कारण

वह रस मुख्य (वास्तविक) नहीं है, क्योंकि उसका कार्य — जैसे व्याधि का शमन आदि — दिखाई नहीं देता।