किं शिवत्वेन तद्व्याप्तमव्याप्तं वाभिधीयताम् ॥५५॥
kiṃ śivatvena tadvyāptamavyāptaṃ vābhidhīyatām
बतलाओ कि वह (समस्त जगत्) शिवत्व से व्याप्त है या अव्याप्त (— दोनों ही विकल्पों में विरोधी निरुत्तर होता है)?
बतलाओ कि वह (समस्त जगत्) शिवत्व से व्याप्त है या अव्याप्त (— दोनों ही विकल्पों में विरोधी निरुत्तर होता है)?