The Vision of Śiva· 3.14 / 99

The Vision of Śiva3.14

3.14
स्वायम्भुवस्य टीकायां बाढमित्यादिना गुरुः । तथा मतङ्गटीकायां व्याख्यानिगुरुणोदितम् ॥१४॥
svāyambhuvasya ṭīkāyāṃ bāḍhamityādinā guruḥ | tathā mataṅgaṭīkāyāṃ vyākhyāniguruṇoditam
— स्वायम्भुव (तन्त्र) की ; — टीका में ; — 'बाढम्' (अवश्य) ; — इत्यादि से ; — गुरु ; — इसी प्रकार ; — मतंग की टीका में ; — व्याख्याता गुरु द्वारा ; — कहा गया

स्वायम्भुव (तन्त्र) की टीका में गुरु 'बाढम्' (अवश्य) इत्यादि (शब्दों) से (यही कहते हैं); और इसी प्रकार मतंग की टीका में व्याख्याता गुरु द्वारा कहा गया है।