The Vision of Śiva· 2.83 / 90

The Vision of Śiva2.83

2.83
पश्यन्ती हि क्रिया तस्या भागौ पूर्वापरौ स्थितौ । न तद्द्रष्टव्यमित्येतद्विमर्शः पूर्वतो भवेत् ॥८३॥
paśyantī hi kriyā tasyā bhāgau pūrvāparau sthitau | na taddraṣṭavyamityetadvimarśaḥ pūrvato bhavet
— पश्यन्ती ; — निश्चय ही ; — क्रिया ; — उसके ; — दो भाग ; — पूर्व और अपर ; — स्थित ; — नहीं (न कि) ; — वह ; — द्रष्टव्य (देखने योग्य) ; — इस प्रकार ; — यह ; — विमर्श ; — पूर्व (भाग) ; — होगा

वस्तुतः पश्यन्ती (तो) क्रिया है; उसके पूर्व और अपर दो भाग स्थित हैं; 'यह द्रष्टव्य (देखने योग्य) है' — यह विमर्श पूर्व (भाग) होगा (— यही हमारा यथार्थ मत है)।