The Vision of Śiva· 2.47 / 90

The Vision of Śiva2.47

2.47
भविष्यन्तं वर्तमानं कथं पश्यन्त्यनागतम् ॥४७॥
bhaviṣyantaṃ vartamānaṃ kathaṃ paśyantyanāgatam
— भविष्य को ; — वर्तमान को ; — कैसे ; — देखती हुई ; — अनागत को

वह (केवल) वर्तमान को देखती हुई भविष्य और अनागत को कैसे देखती है?