1.46 एवं सर्वेषु भावेषु यथा सा शिवरूपता ॥४६॥ evaṃ sarveṣu bhāveṣu yathā sā śivarūpatā evam — इस प्रकार ; sarveṣu — समस्त में ; bhāveṣu — भावों में ; yathā — जैसे ; sā — वह ; śivarūpatā — शिवरूपता इस प्रकार समस्त भावों में जैसे वह शिवरूपता है —