Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.29 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.29

7.29
जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये । ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् ॥ ७-२९ ॥
jarāmaraṇamokṣāya māmāśritya yatanti ye | te brahma tadviduḥ kṛtsnamadhyātmaṃ karma cākhilam || 7-29 ||
— जरा-मृत्यु से मुक्ति के लिए ; — जो मेरा आश्रय लेकर यत्न करते हैं ; — वे उस ब्रह्म को पूर्णतः जानते हैं ; — अध्यात्म को और समस्त कर्म को

जो जरा और मृत्यु से मुक्ति के लिए मेरा आश्रय लेकर यत्न करते हैं, वे उस ब्रह्म को पूर्णतः जानते हैं, और अध्यात्म को तथा समस्त कर्म को।