Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.28 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.28

7.28
येषां त्वन्तं गतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् । ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥ ७-२८ ॥
yeṣāṃ tvantaṃ gataṃ pāpaṃ janānāṃ puṇyakarmaṇām | te dvandvamohanirmuktā bhajante māṃ dṛḍhavratāḥ || 7-28 ||
— किन्तु जिनका पाप समाप्त हो गया ; — पुण्यकर्म करने वाले लोगों का ; — वे द्वन्द्व-मोह से मुक्त ; — मुझे भजते हैं, दृढ़व्रत होकर

किन्तु जिन पुण्यकर्म करने वाले लोगों का पाप समाप्त हो गया है, वे द्वन्द्व-मोह से मुक्त होकर दृढ़व्रत होकर मुझे भजते हैं।