ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न हृष्यति ।
समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम् ॥
१८-५४ ॥
brahmabhūtaḥ prasannātmā na śocati na hṛṣyati |
samaḥ sarveṣu bhūteṣu madbhaktiṃ labhate parām ||
18-54 ||
ब्रह्मभूत, प्रसन्न आत्मा वाला न शोक करता है, न हर्ष; समस्त भूतों में समान होकर वह मुझमें परम भक्ति को प्राप्त करता है।