Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.46 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.46

18.46
यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् । स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः ॥ १८-४६ ॥
yataḥ pravṛttirbhūtānāṃ yena sarvamidaṃ tatam | svakarmaṇā tamabhyarcya siddhiṃ vindati mānavaḥ || 18-46 ||
— जिससे भूतों की प्रवृत्ति ; — जिससे यह सब व्याप्त ; — अपने कर्म से उसे पूजकर ; — मनुष्य सिद्धि को पाता है

जिससे भूतों की प्रवृत्ति होती है, और जिससे यह सब व्याप्त है, उस (परमेश्वर) को अपने कर्म से पूजकर मनुष्य सिद्धि को पाता है।