श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्विषम् ॥
१८-४७ ॥
śreyānsvadharmo viguṇaḥ paradharmātsvanuṣṭhitāt |
svabhāvaniyataṃ karma kurvannāpnoti kilviṣam ||
18-47 ||
गुणरहित (अपूर्ण) अपना धर्म भली-भाँति आचरित पराये धर्म से श्रेष्ठ है; अपने स्वभाव से नियत कर्म करता हुआ मनुष्य पाप को प्राप्त नहीं होता।