Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.4 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.4

17.4
यजन्ते सात्त्विका देवान्यक्षरक्षांसि राजसाः । भूतप्रेतपिशाचांश्च यजन्ते तामसा जनाः ॥ १७-४ ॥
yajante sāttvikā devānyakṣarakṣāṃsi rājasāḥ | bhūtapretapiśācāṃśca yajante tāmasā janāḥ || 17-4 ||
— सात्त्विक देवताओं को पूजते हैं ; — राजस यक्ष-राक्षसों को ; — और भूत, प्रेत, पिशाचों को ; — तामस लोग पूजते हैं

सात्त्विक लोग देवताओं को पूजते हैं, राजस लोग यक्ष और राक्षसों को; और तामस लोग भूत, प्रेत और पिशाचों को पूजते हैं।