Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 14.1 / 27

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)14.1

14.1
परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥ १४-१ ॥
paraṃ bhūyaḥ pravakṣyāmi jñānānāṃ jñānamuttamam | yajjñātvā munayaḥ sarve parāṃ siddhimito gatāḥ || 14-1 ||
— फिर से परम ज्ञान कहूँगा ; — समस्त ज्ञानों में उत्तम ; — जिसे जानकर समस्त मुनि ; — यहाँ से परम सिद्धि को प्राप्त हुए

मैं फिर से परम और समस्त ज्ञानों में उत्तम ज्ञान कहूँगा, जिसे जानकर समस्त मुनि यहाँ से परम सिद्धि को प्राप्त हुए।