Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.33 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.33

13.33
यथा सर्वगतं सौक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते । सर्वत्रावस्थितो देहे तथात्मा नोपलिप्यते ॥ १३-३३ ॥
yathā sarvagataṃ saukṣmyādākāśaṃ nopalipyate | sarvatrāvasthito dehe tathātmā nopalipyate || 13-33 ||
— जैसे सर्वव्यापी, सूक्ष्म होने से ; — आकाश लिप्त नहीं होता ; — देह में सर्वत्र स्थित ; — वैसे ही आत्मा लिप्त नहीं होता

जैसे सर्वव्यापी आकाश सूक्ष्म होने के कारण लिप्त नहीं होता, वैसे ही देह में सर्वत्र स्थित आत्मा लिप्त नहीं होता।