यथा सर्वगतं सौक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते ।
सर्वत्रावस्थितो देहे तथात्मा नोपलिप्यते ॥
१३-३३ ॥
yathā sarvagataṃ saukṣmyādākāśaṃ nopalipyate |
sarvatrāvasthito dehe tathātmā nopalipyate ||
13-33 ||
जैसे सर्वव्यापी आकाश सूक्ष्म होने के कारण लिप्त नहीं होता, वैसे ही देह में सर्वत्र स्थित आत्मा लिप्त नहीं होता।